पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते ,पांढुर्णा ( खबरें एवं विज्ञापन प्रकाशित करने संपर्क करें )
पांढुर्णा जिले के निवासी श्री उमाजी सलामे ने अपनी अथक मेहनत, दृढ़ लगन एवं आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग से मत्स्य पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता अर्जित कर जिले के किसानों एवं युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। सीमित संसाधनों से शुरुआत करने वाले श्री सलामे ने आज अपने परिश्रम और दूरदृष्टि के बल पर मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित की है। श्री उमाजी सलामे लंबे समय से मत्स्य पालन कार्य से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पारंपरिक पद्धतियों के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपने उत्पादन में निरंतर वृद्धि की। वर्तमान में उनका वार्षिक मत्स्य उत्पादन 100 टन से अधिक पहुंच चुका है, जो क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। मत्स्य पालन के साथ-साथ श्री सलामे सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे आदिवासी बिछुआ साहनी समिति के अध्यक्ष हैं तथा समाज के लोगों को आत्मनिर्भर बनने एवं स्वरोजगार अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित करते हैं। उनके प्रयासों से 21 परिवारों को रोजगार प्राप्त हुआ है, जिससे अनेक परिवारों की आजीविका सुदृढ़ हुई है।
कृषि एवं मत्स्य क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान और नवाचारपूर्ण कार्यशैली को देखते हुए उन्हें “किसान सर्वोत्तम पुरस्कार” से भी सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान उनके निरंतर परिश्रम, समर्पण और नवाचार का प्रतीक है।
श्री उमाजी सलामे का कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें, तो मत्स्य पालन एक अत्यंत लाभकारी व्यवसाय साबित हो सकता है। उन्होंने युवाओं से स्वरोजगार की दिशा में आगे आने तथा शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।
आज श्री उमाजी सलामे की सफलता पूरे जिले के लिए प्रेरणा का विषय बन चुकी है। उनकी उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि मेहनत, सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी व्यक्ति सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।









