*पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते*
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पांढुरना प्राचीन गणपति मठ की संपत्ति के राजस्व अभिलेखों में कथित काट-छांट और हेरफेर की शिकायतों के बीच वीरशैव लिंगायत समाज के अध्यक्ष एवं पूर्व पटवारी राजू उर्फ दिलीप जुननकर ने गुरुवार शाम को उन पर लगाए गए निराधार आरोपों पर उन्होंने अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखा। उन्होंने मठ के महाराज पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि मठ में करीब 34 लाख रुपये का गबन हुआ है, जिसकी शिकायत दर्ज कराए जाने के बावजूद पिछले दो वर्षों से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। राजू जुननकर ने राजस्व अभिलेखों में हेरफेर के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि मठ से संबंधित रिकॉर्ड में किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तत्कालीन तहसीलदार के आदेश के बाद ही राजस्व रिकॉर्ड में प्राचीन गणेश मठ और लिंगायत मठ के नाम दर्ज हुए थे। उन्होंने कहा कि यदि किसी को रिकॉर्ड की सत्यता पर संदेह है तो वह तहसील कार्यालय में उपलब्ध मूल दस्तावेजों का अवलोकन कर सकता है। पूर्व पटवारी ने आरोप लगाया कि प्राचीन गणपति मठ के नवनिर्माण का कार्य लंबे समय से रूका हुआ है और इसके लिए महाराज जिम्मेदार है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन विभिन्न विवादों और व्यक्तिगत स्वार्थों के कारण यह कार्य प्रभावित होता रहा है। उन्होंने कहा कि मठ के विकास और निर्माण कार्य में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं, जिससे समाज की भावनाएं भी आहत हो रही हैं। राजू जुननकर ने प्राचीन गणपति मठ के लिए एक सार्वजनिक ट्रस्ट गठित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि मठ का संचालन और विकास पारदर्शी व्यवस्था के तहत होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि मठ के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी स्वयं अपने हाथ में लेकर उसे शीघ्र पूरा कराया जाए, ताकि लंबे समय से लंबित विकास कार्य पूर्ण हो सकें और विवादों का समाधान हो सके।









