*पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते पांढुर्णा*
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पांढुर्णा सावन माह में भगवान शिव की आराधना के सबसे बड़े पर्व कांवड़ यात्रा के तहत बजरंग कांवड़ संघ पांढुर्णा के 18 शिवभक्तों ने बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (बाबाधाम) की पवित्र यात्रा पूरी कर पांढुर्णा वापसी की। धार्मिक आस्था और उत्साह से भरी इस यात्रा में श्रद्धालुओं ने पहले काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए और इसके बाद सुल्तानगंज से कांवड़ में गंगाजल लेकर करीब 120 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। यात्रा में तनय अग्रवाल, विक्रमसिंह ठाकुर, अश्विन निनावे, ईश्वर वाढुलकर, चंद्रशेखर बुआड़े, दिनेश घाटोड़े, श्याम सोलंकी, वीरेन्द्र पालीवाल, ललित खवसे, पंकज गाड़गे, नंदकिशोर कोल्हे, ललित पटेल, राकेश देशमुख, गणेश वाघमारे, गणेश कोल्हे, रवि जौंजाल, रंजित टेकाम और बालकृष्ण पराडकर मामा शामिल रहे। यात्रा पूर्ण कर लौटे शिवभक्तों का धार्मिक उत्साह और उमंग देखते ही बन रहा था।
बजरंग कांवड़ संघ का जत्था 7 अगस्त की रात अमरावती-जबलपुर एक्सप्रेस से जबलपुर के लिए रवाना हुआ। जबलपुर पहुंचने के बाद पांढुर्णा के 18 शिवभक्त वहां से 56 श्रद्धालुओं के जत्थे में शामिल हुए और वाराणसी के लिए रवाना हुए। वाराणसी पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन-पूजन किए। मंदिर में भगवान शिव की आराधना के साथ सभी ने मां गंगा का आशीर्वाद लिया और आगे की कांवड़ यात्रा के लिए प्रस्थान किया।
वाराणसी के बाद श्रद्धालु बिहार के सुल्तानगंज पहुंचे। यहां उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद कांवड़ में पवित्र गंगाजल भरा गया और बाबा बैद्यनाथ धाम तक की करीब 120 किलोमीटर लंबी पदयात्रा शुरू हुई। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु पूरे मार्ग में बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष करते हुए आगे बढ़ते रहे। कठिन पदयात्रा के दौरान निर्धारित पड़ावों पर विश्राम किया गया और धार्मिक अनुशासन के साथ यात्रा जारी रखी गई।
कई पड़ाव पार करने के बाद श्रद्धालुओं का जत्था देवघर स्थित प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचा। यहां कांवड़ में लाए गए गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि, शांति एवं कल्याण की कामना की। दर्शन-पूजन के बाद सभी शिवभक्तों में विशेष उत्साह और आध्यात्मिक आनंद का माहौल रहा।
शिवभक्तों ने बताया कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, संयम, सेवा और संकल्प का प्रतीक है। सदियों पुरानी इस परंपरा के अनुरूप श्रद्धालुओं ने कठिन पदयात्रा पूरी कर बाबा बैद्यनाथ को गंगाजल अर्पित किया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में एक-दूसरे के प्रति सहयोग और सेवा की भावना भी देखने को मिली।








