*पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते पांढुर्णा*
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पांढुर्णा 29 अक्टूबर 2026 मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के साथ छोटे स्तर से शुरू किया गया प्रयास भी स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बन सकता है। ग्राम चिचखेड़ा के युवा हिमांशु गाजरें और निखिल कोहले ने ओयस्टर मशरूम उत्पादन के माध्यम से यह साबित किया है। दोनों युवाओं ने 10 बैग से मशरूम उत्पादन की शुरुआत की थी, जो आज बढ़कर लगभग 400 बैग तक पहुंच गया है।
हिमांशु और निखिल ने 10 सितंबर 2026 को गांव में 15×15 फीट के कमरे से मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। शुरुआती चरण में केवल 10 बैग से शुरुआत करने के बाद निरंतर प्रयासों से उन्होंने अपने कार्य का विस्तार किया। वर्तमान में उनके फार्म पर प्रतिदिन लगभग 10 से 15 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन हो रहा है।
फार्म पर उत्पादित मशरूम का बाजार मूल्य लगभग 200 से 250 रुपये प्रति किलोग्राम है। कम जगह में शुरू की गई यह पहल कृषि आधारित स्वरोजगार की संभावनाओं को दर्शाती है। दोनों युवाओं ने अपने प्रयासों से यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि सही जानकारी, तकनीक और निरंतर मेहनत के माध्यम से सीमित संसाधनों में भी व्यवसाय विकसित किया जा सकता है।
हिमांशु और निखिल अपने फार्म पर इच्छुक लोगों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं, ताकि अधिक से अधिक युवा इस तकनीक को सीखकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकें। उनके अनुसार, मशरूम उत्पादन में रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग किए बिना उत्पादन करने की पद्धति अपनाने पर जोर दिया जाता है।
ग्राम चिचखेड़ा जिला पांढुर्णा के इन दोनों युवाओं की पहल ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका प्रयास दर्शाता है कि नवाचार, मेहनत और आत्मनिर्भर बनने के संकल्प से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।








