बेरडी में 100 वर्षों से अधिक पुरानी अखंड हरिनाम सप्ताह की परंपरा का होगा भव्य समापन, दही-लाही महाप्रसाद एवं महाकाले के कीर्तन में डेढ़ लाख तक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना, कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने की व्यापक व्यवस्थाएं, वारकरी संप्रदाय की समृद्ध परंपरा, महाराष्ट्रीयन संस्कृति और सामाजिक समरसता का अनुपम संगम है बेरडी का पंढरीनाथ मंदिर सप्ताह पांढुर्णा जिले में कानून एवं शांति व्यवस्था के संबंध में दिए आवश्यक निर्देश, चिन्हित अपराधियों के विरुद्ध सख्त कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश : कलेक्टर श्री वशिष्ठ रामलीला मैदान, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले देशव्यापी “वोट चोरों से देश बचाओ अभियान” की तैयारियों को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने महत्वपूर्ण बैठक की आयोजित।, इस बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC), नई दिल्ली द्वारा नवनियुक्त पर्यवेक्षक श्री बिमल शाह जी (गुजरात) विशेष रूप से उपस्थित रहे।, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी रूपरेखा उद्देश्य सभी पदाधिकारियों से अभियान की सफलता हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। अवैध मादक पदार्थों की तस्करी बिक्री पर रोकथाम तथा अवैध तंबाकू के विक्रय एवं जुआ पर करें सख्त कार्यवाही, एनकॉर्ड समिति की बैठक में संबंधित विभागों को समन्वय करने दिए निर्देश  हिट एंड रन, अवैध कॉलोनियों, विस्फोटक सामग्री एवं पटाखा गोदामों के नियमित निरीक्षण तथा सुरक्षा कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय सीमा बैठक में कलेक्टर ने की समीक्षा निराकरण सुनिश्चित करने के दिए निर्देश महात्मा फुले जी की 200जंयती पर छिंदवाडा शहर पवार टी हाउस के पास महात्मा फुले चौक आंबटन एवं प्रवेश द्वार बनाने निगम आयुक्त के महात्मा फुले शिक्षण समिति ने सौंपा ज्ञापन रखी मांग, नगर निगम में प्रस्ताव रखकर महात्मा ज्योतिबा फुले जंयती पर प्रवेश द्वार लगाने दिया आश्वासन

संभावित अल्प वर्षा पर सीएम डॉ. मोहन यादव की नजर, कहा- सभी विभाग रखें समन्वित तैयारी,  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की पूर्व तैयारियों की समीक्षा, दिए निर्देश

*पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते पांढुर्णा*

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– *कम पानी-कम अवधि वाली फसलें अपनाने के लिए किसानों को करें प्रेरित*

– *पूर्व चेतावनी के लिए बनाए जाएंगे राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड*

 

भोपाल। संभावित अल्पवर्षा के मद्देजनर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 जुलाई को मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित अन्य संबंधित विभागों की पूर्व तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को चुनौती नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समयबद्ध तैयारी के अवसर के रूप में लिया जाए। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए किसानों को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं, ताकि प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि प्रदेश का प्रत्येक किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक सोच और उचित तैयारी के साथ करे। समय पर सही निर्णय और विभागों के प्रभावी समन्वय से हम संभावित अल्प वर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर तथा कोदो-कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने के साथ किसानों के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं।

*किसानों को अलर्ट करें*

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को जल्दबाजी में बुआई नहीं करने के लिए भी प्रेरित किया जाए। खेतों में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुआई की जाए तथा नमी संरक्षण के उपाय अपनाए जाएं। साथ ही कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि कृषि वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों के सुझावों को प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसल का चयन कर सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संभावित अल्प वर्षा की स्थिति पर सतत निगरानी रखे हुए है। सभी संबंधित विभाग पूर्व नियोजित कार्य योजना के अनुसार समन्वित रूप से कार्य करें और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि किसानों का हित सर्वोपरि है और उनकी सुरक्षा, समृद्धि तथा कृषि उत्पादन को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी।

 

*अगले दो वर्षों की तैयारी*

*संभावित अल्प वर्षा पर सीएम डॉ. मोहन की नजर, कहा- सभी विभाग रखें समन्वित तैयारी*

– *मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की पूर्व तैयारियों की समीक्षा, दिए निर्देश*
– *कम पानी-कम अवधि वाली फसलें अपनाने के लिए किसानों को करें प्रेरित*
– *पूर्व चेतावनी के लिए बनाए जाएंगे राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड*

भोपाल। संभावित अल्पवर्षा के मद्देजनर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 जुलाई को मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित अन्य संबंधित विभागों की पूर्व तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को चुनौती नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समयबद्ध तैयारी के अवसर के रूप में लिया जाए। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए किसानों को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं, ताकि प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि प्रदेश का प्रत्येक किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक सोच और उचित तैयारी के साथ करे। समय पर सही निर्णय और विभागों के प्रभावी समन्वय से हम संभावित अल्प वर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर तथा कोदो-कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने के साथ किसानों के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं।

*किसानों को अलर्ट करें*

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को जल्दबाजी में बुआई नहीं करने के लिए भी प्रेरित किया जाए। खेतों में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुआई की जाए तथा नमी संरक्षण के उपाय अपनाए जाएं। साथ ही कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि कृषि वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों के सुझावों को प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसल का चयन कर सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संभावित अल्प वर्षा की स्थिति पर सतत निगरानी रखे हुए है। सभी संबंधित विभाग पूर्व नियोजित कार्य योजना के अनुसार समन्वित रूप से कार्य करें और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि किसानों का हित सर्वोपरि है और उनकी सुरक्षा, समृद्धि तथा कृषि उत्पादन को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी।

*अगले दो वर्षों की तैयारी*

प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वैकल्पिक स्रोतों का चिन्हांकन एवं टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार कर अमृत 2.0 के अंतर्गत जलप्रदाय योजनाओं का समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की ग्रामवार समीक्षा, बंद, अपूर्ण नल-जल योजनाओं की मरम्मत का 90 दिवसीय अभियान चलाया जाएगा। “जलाभिषेक 2.0” के तहत प्रदेश में पुराने तालाबों, बावड़ियों, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं का सर्वे एवं जीर्णोद्धार, मनरेगा अभिसरण से प्रति विकासखंड न्यूनतम 100 जल संरचनाओं का पुनर्जीवन दो वर्षों में किया जाएगा। भूजल पुनर्भरण अभियान के तहत सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम एवं खेत-तालाब निर्माण का मिशन मोड कार्यक्रम; “खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में” सिद्धांत पर चलाया जाएगा। नहरों की सफाई मरम्मत रबी से पूर्व पूर्ण, टेल-एंड तक पानी पहुंचाने की जवाबदेही तय की जायेगी।

*हर तरह का तैयार किया जा रहा प्लान*
बैठक में बताया गया कि कम जल मांग वाली फसलों यथा दलहन, तिलहन, श्रीअन्न (मोटे अनाज) प्रोत्साहन एवं एमएसपी पर उपार्जन, ग्रीष्मकालीन धान-मूंग पर जल उपलब्धता आधारित सलाह, धान क्षेत्रों में डीएसआर (सीधी बुवाई) एवं वैकल्पिक गीला-सूखा पद्धति एवं प्रत्येक जिले के लिए कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जा रहा है। जलविद्युत एवं जलाशय प्रबंधन के तहत सभी प्रमुख जलाशयों, इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर, गांधीसागर के लिए रूल कर्व का कड़ाई से पालन; जल उपयोग की प्राथमिकता दी जाएगी। पहले पेयजल, फिर सिंचाई, फिर विद्युत उत्पादन का स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जा रहा है। रियल-टाइम मॉनिटरिंग एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड बनाए जाएंगे। “जल गंगा संवर्धन” की तर्ज पर जनभागीदारी आधारित सतत् अभियान चलाए जाएंगे। प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट आकस्मिक योजना बनाई जाएगी।

*किसानों को किया जाएगा जागरूक*

बैठक में बताया गया कि आरबीसी 6(4) के अंतर्गत क्षति सर्वे हेतु राजस्व, कृषि एवं पंचायत अमले का संयुक्त प्रशिक्षण अभी से पूर्ण; डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं सैटेलाइट इमेजरी आधारित क्षति आकलन प्रणाली का सत्यापन कराया जाएगा, ताकि सर्वे 15 दिवस में पूरा हो सके। फसल बीमा का कवरेज विस्तार एवं दावा तत्परता से हो, इस संबंध में कार्यवाही की जाएगी। राज्य स्तरीय मॉडल आकस्मिक कार्य योजना तैयार कराकर विभागीय पोर्टल पर अपलोड कराई गई हैं। विभिन्न योजनाओं में फसल प्रदर्शनों, उन्नत फसल किस्मों के बीज वितरण के लक्ष्य जिलों को जारी किए गए हैं। वर्षा जल संरक्षण हेतु बलराम तालाब अन्तर्गत जिलों को लक्ष्य जारी किए गए। सोशल मीडिया का अधिकाधिक उपयोग कर कृषकों को जागरूक किया जाएगा। मौसम के पूर्वानुमान, फसलों में मौसम अनुसार किए जाने वाले कार्यों तथा अन्य समसामयिक सलाह कृषकों को उपलब्ध कराई जा रही है। सभी जिले के कलेक्टरों को सिंचाई, जल भराव की स्थिति, जीवन रक्षक सिंचाई हेतु विद्युत की उपलब्धता, सूखे की निगरानी व्यवस्था हेतु समस्त विभागों से कार्यवाही की नियमित समीक्षा हेतु लेख किया गया है। 26 से 30 जून की अवधि में आयोजित ग्राम सभाओं में आकस्मिक कार्य योजना की चर्चा की गई।

प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वैकल्पिक स्रोतों का चिन्हांकन एवं टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार कर अमृत 2.0 के अंतर्गत जलप्रदाय योजनाओं का समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की ग्रामवार समीक्षा, बंद, अपूर्ण नल-जल योजनाओं की मरम्मत का 90 दिवसीय अभियान चलाया जाएगा। “जलाभिषेक 2.0” के तहत प्रदेश में पुराने तालाबों, बावड़ियों, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं का सर्वे एवं जीर्णोद्धार, मनरेगा अभिसरण से प्रति विकासखंड न्यूनतम 100 जल संरचनाओं का पुनर्जीवन दो वर्षों में किया जाएगा। भूजल पुनर्भरण अभियान के तहत सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम एवं खेत-तालाब निर्माण का मिशन मोड कार्यक्रम; “खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में” सिद्धांत पर चलाया जाएगा। नहरों की सफाई मरम्मत रबी से पूर्व पूर्ण, टेल-एंड तक पानी पहुंचाने की जवाबदेही तय की जायेगी।

*हर तरह का तैयार किया जा रहा प्लान*

बैठक में बताया गया कि कम जल मांग वाली फसलों यथा दलहन, तिलहन, श्रीअन्न (मोटे अनाज) प्रोत्साहन एवं एमएसपी पर उपार्जन, ग्रीष्मकालीन धान-मूंग पर जल उपलब्धता आधारित सलाह, धान क्षेत्रों में डीएसआर (सीधी बुवाई) एवं वैकल्पिक गीला-सूखा पद्धति एवं प्रत्येक जिले के लिए कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जा रहा है। जलविद्युत एवं जलाशय प्रबंधन के तहत सभी प्रमुख जलाशयों, इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर, गांधीसागर के लिए रूल कर्व का कड़ाई से पालन; जल उपयोग की प्राथमिकता दी जाएगी। पहले पेयजल, फिर सिंचाई, फिर विद्युत उत्पादन का स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जा रहा है। रियल-टाइम मॉनिटरिंग एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड बनाए जाएंगे। “जल गंगा संवर्धन” की तर्ज पर जनभागीदारी आधारित सतत् अभियान चलाए जाएंगे। प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट आकस्मिक योजना बनाई जाएगी।

*किसानों को किया जाएगा जागरूक* 

बैठक में बताया गया कि आरबीसी 6(4) के अंतर्गत क्षति सर्वे हेतु राजस्व, कृषि एवं पंचायत अमले का संयुक्त प्रशिक्षण अभी से पूर्ण; डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं सैटेलाइट इमेजरी आधारित क्षति आकलन प्रणाली का सत्यापन कराया जाएगा, ताकि सर्वे 15 दिवस में पूरा हो सके। फसल बीमा का कवरेज विस्तार एवं दावा तत्परता से हो, इस संबंध में कार्यवाही की जाएगी। राज्य स्तरीय मॉडल आकस्मिक कार्य योजना तैयार कराकर विभागीय पोर्टल पर अपलोड कराई गई हैं। विभिन्न योजनाओं में फसल प्रदर्शनों, उन्नत फसल किस्मों के बीज वितरण के लक्ष्य जिलों को जारी किए गए हैं। वर्षा जल संरक्षण हेतु बलराम तालाब अन्तर्गत जिलों को लक्ष्य जारी किए गए। सोशल मीडिया का अधिकाधिक उपयोग कर कृषकों को जागरूक किया जाएगा। मौसम के पूर्वानुमान, फसलों में मौसम अनुसार किए जाने वाले कार्यों तथा अन्य समसामयिक सलाह कृषकों को उपलब्ध कराई जा रही है। सभी जिले के कलेक्टरों को सिंचाई, जल भराव की स्थिति, जीवन रक्षक सिंचाई हेतु विद्युत की उपलब्धता, सूखे की निगरानी व्यवस्था हेतु समस्त विभागों से कार्यवाही की नियमित समीक्षा हेतु लेख किया गया है। 26 से 30 जून की अवधि में आयोजित ग्राम सभाओं में आकस्मिक कार्य योजना की चर्चा की गई।

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महात्मा फुले जी की 200जंयती पर छिंदवाडा शहर पवार टी हाउस के पास महात्मा फुले चौक आंबटन एवं प्रवेश द्वार बनाने निगम आयुक्त के महात्मा फुले शिक्षण समिति ने सौंपा ज्ञापन रखी मांग, नगर निगम में प्रस्ताव रखकर महात्मा ज्योतिबा फुले जंयती पर प्रवेश द्वार लगाने दिया आश्वासन

महात्मा फुले जी की 200जंयती पर छिंदवाडा शहर पवार टी हाउस के पास महात्मा फुले चौक आंबटन एवं प्रवेश द्वार बनाने निगम आयुक्त के महात्मा फुले शिक्षण समिति ने सौंपा ज्ञापन रखी मांग, नगर निगम में प्रस्ताव रखकर महात्मा ज्योतिबा फुले जंयती पर प्रवेश द्वार लगाने दिया आश्वासन

महात्मा फुले जी की 200जंयती पर छिंदवाडा शहर पवार टी हाउस के पास महात्मा फुले चौक आंबटन एवं प्रवेश द्वार बनाने निगम आयुक्त के महात्मा फुले शिक्षण समिति ने सौंपा ज्ञापन रखी मांग, नगर निगम में प्रस्ताव रखकर महात्मा ज्योतिबा फुले जंयती पर प्रवेश द्वार लगाने दिया आश्वासन

सौसर की बेटी अदिति डवले ने फोरेंसिक साइंस में हासिल किया गोल्ड मेडल भाजपा जिलाध्यक्ष संदीप मोहोड ने दी बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।, अदिति ने ओरिएंटल यूनिवर्सिटी, इंदौर में एमएससी (फोरेंसिक साइंस) की परीक्षा में विश्वविद्यालय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर गोल्ड मेडल हासिल किया। सौसर नगर सहित पूरे पांढुर्णा जिले में हर्ष और गौरव का वातावरण है।

पांढुरना ग्राम सिवनी के लाल श्रावण चांदेकर बने CISF में इंस्पेक्टर, प्रधानमंत्री की सुरक्षा SPG में निभा चुके अहम् जिम्मेदारी एवं RSS प्रमुख सर संघचालक के भी रह चुके हैं PSO , वर्ष 2010 में CISF में उप निरीक्षक के पद पर अपनी सेवा शुरू की थी। छोटे से कस्बे से निकलकर केंद्रीय सुरक्षा बल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाना युवाओं के लिए मार्गदर्शक एवम् प्रेरणादायक l