*पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते पांढुर्णा*
(आपके आस पास क्षेत्र खबरें एवं विज्ञापन प्रकाशित करने हेतु संपर्क करें.6262250843 )

पांढुर्ना. देश में कोई जन्म ले या किसी की मृत्यु हो जाएं हर मौके पर सेन समाज की जरूरत होती है। जन्म हुआ तो मुंडन कराने और मृत्यु हुई तो दशकिया में सेन समाज की जरूरत पड़ती ही है। इनके बिना अनुश्ठान पुरे नहीं होते। ऐसे समाज में जन्म लेने के लिये पुण्य कमाने होते है। उक्त आशय की बातें आकाश महाराज भटे ने संत सेनाजी महाराज की पुण्यतिथी महोत्सव अवसर पर उपस्थित समाजिक लोगों को काला किर्तन में कही। उन्होंने कहा संतो का एक काल था जब उन्होंने समकक्ष जन्म लिया। संत नामदेव, संत ज्ञानेश्वर, संत सावता, संत सेनाजी महाराज सभी समकक्ष थे। इन संतो ने कभी अपना धर्म नहीं देखा उन्होंने एक ही धर्म देखा वो है वारकरी। संत सेनाजी महाराज की ख्याति इतनी है कि गुरुग्रंथ साहिब के ग्रंथ में संत सेनाजी महाराज के अभंग है। इस अवसर पर संत सेनाजी महाराज समाज संगठन द्वारा नैमिश्यारण्य धाम शिव मंदिर परिसर में महोत्सव का आयोजन किया था। सामाजिक लोगों की उपस्थिति में भक्तिभाव के साथ पुण्यतिथी मनाई गयी। सुबह कलश स्थापना कर पुजन किया गया। इसके बाद किर्तन काला का आयोजन हुआ। समाज संगठन के अध्यक्ष तरूण खिरेकर ने समाज में भेदभाव के स्थान पर आपसी सामंजस्य के साथ काम करने की सलाह दि। उन्होंने कहा कि सभी समाज में हर वर्ग के लोग होते हैं। हमें दूसरों की बुराई छोडकर खुद को अच्छा बनाने पर जोर देना होगा। सचिव जितेन्द्र अतकरे ने कहा कि आज के दौर में समाज के कार्यक्रमों को वक्त देने के लिये समय नहीं है। लेकिन हम अपने समाज से जुड़े रहेंगे तो हमारी आने वाली पिढी तक इसका महत्व बना रहेगा। कार्यक्रम को सफल बनाने में दिपराज अनेराव, अनिता अनेराव, संजय धानोरकर, रोशन चातरकर, राकेश निवुलकर, रूपेश येउतकर, निखील येउतकर, अंकुश पानबुडे, कैलाश बाभुलकर, पिंटु राउत, संदिप धानोरकर, गुलशन राउत, विक्की बाभुलकर, मंगेश बाभुलकर और अन्य युवाओं ने सहयोग प्रदान किया।







