*पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते पांढुर्णा*
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पांढुर्णा मोहखेड़ क्षेत्र ग्राम रोहना से रैय्यतवाड़ सड़क मार्ग लगभग 3.50 किलोमीटर जो लावघोघरी मार्ग से जुड़ती है जो गोविंदवाडी माल पंचायत के अंतर्गत आना बताया गया है। इस संबंध सूत्रों जानकारों एवं ग्रामीणों ने बताया की ग्राम रोहना से रैय्यतवाड़ सड़क मार्ग लगभग 3.50 किलो मीटर का सड़क मार्ग आज़ादी के बाद से आज तक आदिवासी ग्रामीणों ने नहीं देखी कभी पक्की सड़क, हर दिन कीचड पाणी से के गुजरकर स्कूल बच्चे ग्रामीण किसान करते रोज़ आवागमन, इस संबंध में कोयतोड़ आदिवासी समाज संघ जिला अध्यक्ष अजय धुर्वे शासन प्रशासन के विकास के दावों पर एक प्रश्न चिन्ह खड़ा किया। काह की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत पी डब्ल्यू डी विभाग द्वारा गिट्टी एवं मुरम डालने का काम 4 साल पुर्व किया गया किंतु आज तक पक्की सड़क नहीं बन पाई।
आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए शासन प्रशासन विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। आज़ादी के 80 वर्षों बाद भी आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों की जनता को सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
इस क्षेत्र ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग से छोटे-छोटे बच्चे पढ़ाई के लिए लावाघोघरी जाते हैं, लेकिन खराब सड़क के कारण उन्हें रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों को आवागमन में कठिनाई होती है और दोपहिया वाहन से दुर्घटना का डर हमेशा बना रहता है। एवं ना ही मार्ग पर बिजली लाईट की व्यवस्था भी नहीं बरसात मौसम में स्कूल या अस्पताल ईलाज कराने शहर से घर लौटने समय शाम होने पर सड़क मार्ग सांप बिच्छू काटने डर का माहौल हमेशा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क मार्ग पर 4 साल पहले केवल प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत गिट्टी एवं मुरम डालने का कार्य तो किया इसके बाद शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का इस सड़क मार्ग की ओर कोई ध्यान नहीं गया। नतीजा यह है कि सड़क आज भी सड़क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
❓ सवाल यह है कि आखिर आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की जिम्मेदारी किसकी है?
चुनाव के समय राजनीतिक दल ग्रामीणों के बीच आकर विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। भोले-भाले ग्रामीण आदिवासी नेताओं पर विश्वास जताते हैं, लेकिन चुनाव के बाद उनकी मूलभूत समस्याएं की ओर अनदेखी रह जाती हैं। अब समय है कि सरकार, शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस सड़क की वास्तविक स्थिति पर गंभीरता से ध्यान दें।
हमारी मांग है कि रोहना से रैय्यतवाड़ी–तोयाडोडा मार्ग का तत्काल निरीक्षण कराकर गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण/सुधारीकरण का कार्य कराया जाए, ताकि ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
यह किसी एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि आदिवासी ग्रामीणों के हक और मूलभूत सुविधाओं का सवाल है।
अब सिर्फ वादे नहीं — जमीन पर विकास चाहिए।
आदिवासी अंचल की आवाज़ को अनसुना नहीं किया जा सकता।
हक और अधिकार की लड़ाई जारी रहेगी। यदि शासन प्रशासन ने रोहना से रैय्यतवाड़ी 3.50 किलो मीटर सड़क मार्ग का निर्माण कार्य नहीं किया तो आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों की जनता द्वारा आंदोलन भी किया जा सकता है। जिसकी सारी जिम्मेदारी शासन प्रशासन एवं जनप्रतिनिधिओ की होंगी। सड़क मार्ग की समस्याओं को लेकर आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों की जनता ने भी अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया गया।







