*पांढुर्णा संवाददाता दैनिक दिव्य सत्ता मनोज सातपुते पांढुर्णा*
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पांढुर्णा जिले में प्रांतीय महिला स्व-सहायता समूह महासंघ के आह्वान पर मध्यान्ह भोजन सांझा चूल्हा रसोइया संघ ने विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार 16 सितंबर से हड़ताल शुरू कर दी। हड़ताल के कारण पांढुर्णा जिले के सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था प्रभावित रही। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने स्कूलों में खाना नहीं बनाया। जिन स्कूलों में भोजन नहीं बन सका, वहां बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिल पाया।
रसोइया संघ ने हड़ताल से पहले जिला प्रशासन को पत्र सौंपकर आंदोलन की सूचना दी थी। संघ का कहना है कि मध्यान्ह भोजन शालाओं एवं आंगनवाड़ियों से संबंधित करीब चार माह का भुगतान लंबित है। भुगतान नहीं होने से भोजन सामग्री की व्यवस्था करने और भोजन संचालन में परेशानी आ रही है। महिलाओं का कहना है कि लंबे समय तक उधार लेकर योजना का संचालन करना संभव नहीं है।
संघ ने टीएचआर योजना के तहत गेहूं और चावल की उचित मात्रा उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके अलावा रसोइया महिलाओं की पिछले तीन वर्षों की 15 दिन की राशि तथा जून 2024, 2025 और 2026 की राशि का भुगतान करने की मांग भी रखी गई है। संघ ने मध्यान्ह भोजन एवं रसोइया राशि के भुगतान के लिए हर माह निश्चित तारीख तय करने की मांग की है, ताकि महिलाओं को बार-बार भुगतान के लिए इंतजार न करना पड़े।
स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिला कल्पना कलमबे ने बताया कि स्कूल में मध्यान्ह भोजन बनाने के काम के बदले उन्हें करीब 4 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है। उनका कहना है कि यह राशि भी समय पर नहीं मिलती। भुगतान में देरी के कारण रोजमर्रा के खर्च के साथ स्कूल में भोजन की व्यवस्था संभालना मुश्किल हो रहा है। रसोइया महिलाओं ने कहा कि नियमित भुगतान नहीं होने से आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हड़ताल के संबंध में बीआरसी कार्यालय, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिले के संबंधित स्कूलों के प्रधान पाठकों को भी सूचना दी गई है। संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों का निराकरण नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताल के कारण स्कूलों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था कितने समय तक प्रभावित रहेगी, यह मांगों के निराकरण पर निर्भर करेगा।







