*पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते पांढुर्णा*
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पांढुर्णा। ग्रामीण क्षेत्रों में अनियमित बिजली आपूर्ति किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। कहीं सिंचाई के लिए निर्धारित 10 घंटे के बजाय रोजाना महज ढाई से तीन घंटे बिजली मिल रही है, तो कहीं बार-बार बिजली आने-जाने से खेतों में सिंचाई करना मुश्किल हो रहा है। बारिश की कमी के कारण पहले ही फसलों की स्थिति प्रभावित है। ऐसे में बिजली संकट ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। समय पर पानी नहीं मिलने से फसलें सूखने लगी हैं, वहीं उत्पादन में गिरावट की आशंका भी बढ़ गई है।
शनिवार को ग्राम वाड़ेगांव, उमरीकलां, हिवरा पृथ्वीराम, कलमगांव, मारूड, लव्हाना और आजनगांव सहित आसपास के क्षेत्रों के किसान जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां किसानों ने अनियमित बिजली आपूर्ति और फसलों को हो रहे नुकसान की समस्या उठाते हुए अपनी व्यथा बताई। किसानों का कहना है कि बिजली की समस्या के कारण खेतों में समय पर सिंचाई नहीं हो पा रही है। इसका असर खेती के साथ-साथ ग्रामीणों के घरेलू कामकाज पर भी पड़ रहा है।
किसान मनोज सेंबेकर, रविन्द्र बनाईत, धनराज राजगुरू और सुमित राजगुरू ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की बार-बार आवाजाही से किसान परेशान हैं। बिजली कभी आती है तो कुछ समय बाद ही बंद हो जाती है। इससे खेतों में सिंचाई की व्यवस्था प्रभावित होती है। किसानों को बिजली मिलने के दौरान ही सिंचाई का काम पूरा करने की चिंता रहती है। अनियमित आपूर्ति के कारण खेती के जरूरी काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं। किसानों ने बिजली व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई।
ग्राम आजनगांव के किसान उज्ज्वल झलके, बाबूराव राजगुरू और अनंता झलके ने बताया कि सिंचाई के लिए निर्धारित 10 घंटे के बजाय केवल ढाई से तीन घंटे बिजली मिल रही है। क्षेत्र में कपास, तुअर, ज्वार, मूंगफली और संतरे की फसलें लगी हुई हैं। बारिश की कमी के बीच इन फसलों को समय पर पानी देना जरूरी है, लेकिन बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण सिंचाई नहीं हो पा रही है। किसानों के अनुसार, समय पर पानी नहीं मिलने से फसलें सूखने लगी हैं। यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसानों ने बिजली संकट के साथ बारिश की कमी से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि कम बारिश के कारण खेती पहले ही प्रभावित है। ऐसे में सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से स्थिति और गंभीर हो रही है। किसानों ने क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित कर प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग की। उन्होंने फसलों की वास्तविक स्थिति का सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने और उसके अनुसार सहायता उपलब्ध कराने की बात कही।
किसानों ने विद्युत विभाग से ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली लाइनों और उपकरणों की जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि केवल अस्थायी सुधार करने के बजाय समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए, ताकि बार-बार बिजली गुल होने की परेशानी से छुटकारा मिल सके। किसानों ने सुधार कार्य की जानकारी लिखित में देने और समस्या के निराकरण के लिए समय-सीमा तय करने की मांग भी रखी। किसानों का कहना है कि खेती के महत्वपूर्ण समय में नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि सिंचाई बाधित न हो और फसलों को बचाया जा सके।







