*पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते पांढुर्णा *
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पांढुर्ना शहर के शारदा मार्केट स्थित प्राचीन सार्वजनिक गणपति मठ की संपत्ति को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, मठ की भूमि पर मालिकाना हक के दावे और पुनर्निर्माण कार्य में उत्पन्न बाधाओं के विरोध में माली समाज संगठन एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुवार को दींडी यात्रा निकालकर एसडीएम तथा लोकन्यास पंजीयक को ज्ञापन सौंपा। नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा लंबे समय से लंबित सार्वजनिक ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपकर बताया गया कि गणेश वार्ड स्थित यह प्राचीन गणपति मठ क्षेत्रवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां वर्षों से धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित होती रही हैं। वर्तमान में मठ का संचालन मठाधीपति शिवाचार्य स्वामीजी द्वारा किया जा रहा है। मठ की इमारत जर्जर हो जाने के कारण इसके पुनर्निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया था, लेकिन इस दौरान संपत्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि तत्कालीन पटवारी राजू उर्फ दिलीप जुननकर ने कुछ लोगों के साथ मिलीभगत कर मूल राजस्व अभिलेखों में काट-छांट और हेरफेर की। आरोप है कि रिकॉर्ड में संशोधन कर एक विशेष समाज का मालिकाना हक दर्शाने का प्रयास किया गया, जबकि गणपति मठ सार्वजनिक धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। नागरिकों का कहना है कि इस कथित हेरफेर के कारण मठ की संपत्ति पर अनावश्यक विवाद उत्पन्न हुआ है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ असामाजिक तत्व मठ के पुनर्निर्माण कार्य में लगातार बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं और मठाधीपति के साथ अभद्र व्यवहार किया गया है। इससे श्रद्धालुओं में रोष व्याप्त है और धार्मिक गतिविधियों के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
नागरिकों ने प्रशासन के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली, 10 जुलाई 2024 से लंबित सार्वजनिक ट्रस्ट गठन के आवेदन का शीघ्र निराकरण कर गणपति मठ को विधिवत ट्रस्ट के संरक्षण में लाया जाए। दूसरी, राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर करने वाले पूर्व पटवारी एवं अन्य जिम्मेदार लोगों की निष्पक्ष जांच कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। तीसरी, ट्रस्ट गठन के बाद जर्जर हो चुके प्राचीन मठ के पुनर्निर्माण कार्य को बिना किसी बाधा के पूरा कराया जाए।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे श्रद्धालुओं और समाजजनों ने कहा कि गणपति मठ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने प्रशासन से मामले में त्वरित हस्तक्षेप कर विवाद का समाधान करने तथा मठ की संपत्ति और धार्मिक गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। ज्ञापन पर बड़ी संख्या में नागरिकों और श्रद्धालुओं के हस्ताक्षर दर्ज किए गए हैं।









