*पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते पांढुर्णा*
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पांढुरना गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर सोमवार को शारदा मार्केट स्थित गणेश वार्ड के प्राचीन गणपति मठ में पांढुरना के आराध्य एवं लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र गणपति बप्पा की स्थापना पूरे विधि-विधान और भव्य धार्मिक वातावरण में संपन्न हुई। बप्पा के विराजते ही गणेश वार्ड सहित पूरा शहर भक्तिमय हो उठा।
दोपहर करीब एक बजे गणपति मठ से भगवान श्रीगणेश की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों की गूंज, डिंडी मंडलियों के भक्तिमय जयघोष तथा कीर्तन-भजन मंडलियों की प्रस्तुतियों के बीच बप्पा को नगर भ्रमण कराया गया। शोभायात्रा जिस मार्ग से भी गुजरी, वहां श्रद्धालुओं ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों के सामने रांगोली सजाकर, आरती उतारकर तथा पुष्पवर्षा कर गणपति बप्पा का स्वागत किया।
‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से गूंजा शहर
शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। जगह-जगह भगवान गणेश के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालु ढोल की थाप और भजनों पर झूमते नजर आए। पूरे मार्ग में ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से वातावरण गुंजायमान रहा।
शोभायात्रा का एक विशेष आकर्षण इसके साथ चल रहे विभिन्न अखाड़े रहे। अखाड़ों के कलाकारों ने रास्ते में अपने पारंपरिक करतबों का प्रदर्शन कर लोगों को रोमांचित कर दिया। युवाओं द्वारा किए गए हैरतअंगेज करतबों ने शोभायात्रा में उत्साह और आकर्षण का नया रंग भर दिया।
970 वर्षों से चली आ रही परंपरा
गणेश वार्ड स्थित गणपति मठ केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि पांढुरना की प्राचीन धार्मिक परंपराओं की पहचान भी माना जाता है। उपलब्ध प्रकाशित जानकारी के अनुसार यहां करीब 970 वर्षों से गणेशोत्सव मनाए जाने की परंपरा चली आ रही है। मठ में स्थापित होने वाली गणेश प्रतिमा के आकार, स्वरूप और परंपरागत श्रृंगार में भी लंबे समय से एकरूपता बनाए रखने की परंपरा बताई जाती है।
मठ की एक और विशेष पहचान यह है कि यहां भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी जोशी परिवार द्वारा चार पीढ़ियों से निभाई जा रही है। वर्तमान में पंडित नंदकिशोर जोशी पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
परंपरा और आस्था का अनूठा संगम
गणपति मठ में हर वर्ष गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मठ की प्राचीन परंपराएं इस आयोजन को शहर के अन्य गणेशोत्सवों से अलग पहचान देती हैं। यही कारण है कि गणेश चतुर्थी के दिन यहां होने वाली गणपति स्थापना और शोभायात्रा को पांढुरना की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जाता है।
नगर भ्रमण के बाद शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से वापस गणपति मठ पहुंची, जहां विधि-विधान के साथ भगवान श्रीगणेश की स्थापना संपन्न हुई। इसके साथ ही आगामी गणेशोत्सव के धार्मिक आयोजनों का शुभारंभ हो गया।
श्रद्धालुओं ने बप्पा से नगर में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।







