*पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते पांढुर्णा*
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पांढुर्णा विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस सप्ताह के अवसर पर ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान द्वारा संचालित नलम सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत शासकीय विज्ञान महाविद्यालय,पांढुर्णा में गुरुवार को मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम विषय पर जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ ने विद्यार्थियों से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहने और तनाव, निराशा अथवा भावनात्मक कठिनाइयों की स्थिति में समय रहते परिवार, मित्र, शिक्षक अथवा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बातचीत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव, लगातार निराशा या सामाजिक दूरी जैसे संकेत दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय संवेदनशीलता से उसकी बात सुनकर आवश्यक सहायता एवं उपचार से जोड़ना चाहिए।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ शहनाज खान, संस्था निदेशक श्री विजय धवले, पुलिस विभाग की महिला प्रकोष्ठ की प्रभारी श्रीमती संस्था सक्सेना,संस्था समन्वयक श्री मनीष सक्सेना,रिसर्च असोशिएट श्री प्रशांत घाटे, महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ लालचन लाल राऊत,डॉ भोजराज कराले,डॉ संदीप राने ,डॉ नंदकिशोर पवार ,गणेश तुमडाम,डॉ कीर्ति सलामे ,डॉ रवींद्र बावने ,प्राध्यापकगण ,नलम कार्यकर्ता, एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
कलेक्टर श्री वशिष्ठ ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, समाज और प्रशासन के सामूहिक प्रयास से ही प्रभावी रूप से संभव है। युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक वातावरण बनाना और इस विषय पर खुलकर संवाद करना आवश्यक है।
संस्था निदेशक श्री विजय धवले ने कहा कि इस वर्ष की थीम “आत्महत्या के बारे में सोच और संवाद को बदलें” है। उन्होंने कहा कि जीवन में तनाव, असफलता और व्यक्तिगत अथवा पारिवारिक कठिनाइयां आ सकती हैं, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में सहायता मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि जीवन के प्रति जिम्मेदारी और साहस का परिचय है। समय पर बातचीत, सहयोग और उचित उपचार से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों से जूझ रहे व्यक्ति को बेहतर होने में सहायता मिल सकती है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शहनाज खान ने विद्यार्थियों को तनाव और भावनात्मक परेशानियों को मन में दबाकर रखने के बजाय माता-पिता, शिक्षकों अथवा किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में संस्था समन्वयक श्री मनीष सक्सेना ने पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य, तनाव के संकेत, आत्महत्या से जुड़े जोखिम संकेत तथा समय पर सहायता लेने के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नलम सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान करने तथा जरूरतमंद व्यक्तियों को परामर्श एवं उपचार सेवाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।







