*पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते पांढुर्णा*
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पांढुर्णा। शहर के गणेश वार्ड स्थित शारदा मार्केट पहुंच मार्ग की छोटी पुलिया अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं, बल्कि आपातकालीन व्यवस्था और नागरिक सुविधा से जुड़ा मुद्दा बन गई है। पुलिया के बीच में पहले लगी लोहे की रेलिंग बारिश के तेज बहाव में बह जाने के बाद फिलहाल रास्ता खुला है। अब वार्डवासियों ने साफ तौर पर मांग उठाई है कि इस पुलिया के बीच दोबारा लोहे की रेलिंग नहीं लगाई जाए।
गणेश वार्ड एवं शारदा मार्केट के रहवासियों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कहा कि पुलिया को बीच से पूरी तरह खुला रखा जाए, ताकि आम नागरिकों के साथ-साथ एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, कचरा वाहन और अन्य आवश्यक सेवा वाहन भी बिना किसी रुकावट के आवागमन कर सकें।
सवाल सिर्फ रेलिंग का नहीं, आपातकालीन पहुंच का है
वार्डवासियों ने अपने ज्ञापन में महत्वपूर्ण सवाल उठाया है कि यदि किसी दिन शारदा मार्केट या गणेश वार्ड में आग लगती है, कोई गंभीर दुर्घटना होती है अथवा किसी मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़ती है, तो संकरा रास्ता आपातकालीन वाहनों की राह में बाधा बन सकता है।
रहवासियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में फायर ब्रिगेड या एंबुलेंस को रास्ता मिलने में परेशानी हुई तो कुछ मिनटों की देरी भी भारी पड़ सकती है। इसलिए पुलिया के बीच में रेलिंग लगाकर आवागमन बाधित करने के बजाय इसे खुला रखना जरूरी है।
कचरा गाड़ी भी नहीं निकल पाएगी
मामला केवल एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड तक सीमित नहीं है। वार्डवासियों के अनुसार नगर पालिका की कचरा गाड़ी भी इसी मार्ग से होकर क्षेत्र में पहुंचती है। पुलिया के बीच में रेलिंग या अन्य अवरोध होने पर कचरा वाहन की आवाजाही प्रभावित होने से सफाई व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
बारिश ने हटाई रेलिंग, अब जनता नहीं चाहती वापसी
वार्डवासियों के अनुसार पूर्व में पुलिया के बीच लोहे की रेलिंग लगी हुई थी, लेकिन बारिश के दौरान तेज बहाव में वह बह गई। इसके बाद मार्ग खुला हो गया। अब क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि जब खुला रास्ता आम लोगों और आवश्यक सेवाओं के लिए अधिक उपयोगी है, तो दोबारा ऐसा अवरोध खड़ा करने की जरूरत ही क्या है?
उन्होंने नगर पालिका से मांग की है कि पुलिया का निरीक्षण कर वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए और पुलिया के बीच किसी भी प्रकार की स्थायी रेलिंग अथवा अवरोध नहीं लगाया जाए।
‘सुरक्षा चाहिए, लेकिन ऐसी नहीं कि रास्ता ही बंद हो जाए’
वार्डवासियों का तर्क है कि पुलिया की सुरक्षा और नागरिकों की सुविधा दोनों महत्वपूर्ण हैं। यदि सुरक्षा के नाम पर ऐसा निर्माण किया जाता है जिससे बड़े और आवश्यक सेवा वाहन ही नहीं निकल पाएं, तो भविष्य में यह व्यवस्था परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए पुलिया की संरचनात्मक सुरक्षा के साथ-साथ आपातकालीन वाहनों की निर्बाध आवाजाही को भी प्राथमिकता देने की मांग की गई है।
ज्ञापन सौंपने वालों में किशोर पालीवाल, अशोक साबले, नानेश्वर तिवस्कर, विनोद टोंगसे, विलास निकम, धनंजय जोशी, प्रवीण भगत, कुणाल पालीवाल, विजय भगत, नरेंद्र अंबुलकर, संदीप बांदरे, शेषराव रेवतकर, प्रवीण ढोमने, नंदकुमार बोकडे, शशिकांत माहोरे, विवेक चऊत्रे, संजय येरपुडे, विजय आसरे सहित अन्य वार्डवासी मौजूद रहे।
अब देखना यह है कि नगर पालिका प्रशासन इस मांग को महज एक सामान्य शिकायत मानता है या फिर इसे आपातकालीन सेवाओं से जुड़े गंभीर नागरिक मुद्दे के रूप में लेते हुए पुलिया को खुला रखने पर निर्णय करता है।







