*पांढुर्णा हलचल न्यूज़ संवाददाता मनोज सातपुते पांढुर्णा*
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पांढुर्णा सौंसर समीपस्थ ग्राम बेरडी स्थित प्रसिद्ध श्री पंढरीनाथ मंदिर का पश्चिमी द्वार मार्ग निजी भूमि मालिक द्वारा बंद किए जाने से श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश पनप रहा है। आगामी 22 से 29 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले ऐतिहासिक अखंड हरिनाम सप्ताह से ठीक पहले बने इस तनावपूर्ण माहौल के चलते क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की गंभीर आशंका बन गई है। आक्रोशित ग्रामीण व हरिभक्त अब स्वयं मार्ग खुलवाने की मानसिकता बना रहे हैं।
गौरतलब है कि चार माह पूर्व भी इस मार्ग को बंद किए जाने पर हजारों ग्रामीणों और हरिभक्तों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया था। उस समय प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले का शीघ्र समाधान निकालने का आश्वासन दिया था, लेकिन लंबे समय बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होने से अब प्रशासन के खिलाफ भी जन-असंतोष भड़क उठा है।
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए बेहद अहम है यह मार्ग
बेरडी के माहेश्वरी चौक से मंदिर तक जाने वाला 600 मीटर का मुख्य रास्ता घनी आबादी के बीच से गुजरता है और अत्यधिक संकरा है। ऐसे में लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आवागमन के लिए पश्चिमी द्वार ही एकमात्र सुगम और सुरक्षित विकल्प रहा है। यह मार्ग मात्र 250 फीट की दूरी पर सीधे सौंसर-लोधीखेड़ा मुख्य मार्ग से जुड़ता है, जिससे भीड़ को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। सालों से चली आ रही इस परंपरा को अचानक रोक दिए जाने से हरिनाम सप्ताह के दौरान बड़ी दुर्घटना या भगदड़ की स्थिति बनने का खतरा मंडरा रहा है।
*मप्र-महाराष्ट्र सहित देशभर से जुटते हैं लाखों वारकरी*
विदित हो कि इस क्षेत्र में पंढरीनाथ मंदिर को वारकरी संप्रदाय के प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र पंढरपुर का प्रतीक माना जाता है। अखंड हरिनाम सप्ताह के दौरान मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सहित देश के कोने-कोने से लाखों वारकरी, संत-मंडली और श्रद्धालु भगवान पंढरीनाथ के दर्शन करने यहाँ पहुँचते हैं।
*प्रशासन से तत्काल दखल की मांग*
पंढरीनाथ मंदिर सेवा समिति, अखंड हरिनाम सप्ताह समिति एवं विभिन्न धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रशासन से अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग की है। प्रतिनिधियों का कहना है कि जनभावनाओं और धार्मिक आस्था पर आघात होने से पहले शासन-प्रशासन पहल करे और मंदिर के बंद पड़े पश्चिमी मार्ग को शीघ्र सुचारू रूप से खुलवाए, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।







